भूमिका मनुष्य एक ऊर्जा है, और समस्त जीवन ऊर्जा का प्रवाह मात्र है। हमारे भीतर अनंत ऊर्जा का भंडार छिपा हुआ है। यह ऊर्जा कैसे बहती है—बाहर की ओर या भीतर की ओर—यही हमारे जीवन की दिशा और अनुभव को परिभाषित करती है। ऊर्जा और जीवन का विज्ञान आधुनिक विज्ञान अब यह मानता है कि पदार्थ केवल सघन ऊर्जा है। हर वस्तु, हर प्राणी ऊर्जा के एक समूह का हिस्सा है। धर्म सदियों से यही कहता आया है: यह संसार एक ऊर्जा का नाटक है। इसे हम परमात्मा, चेतना, या शक्ति के रूप में जानते हैं। अगर ऊर्जा बाहर की ओर बहती है, तो यह काम (वासना) बन जाती है। और अगर यह भीतर की ओर बहती है, तो यह अकाम (आत्मा) बनती है। काम: ऊर्जा का बाहरी प्रवाह जब हमारी ऊर्जा बाहरी वस्तुओं की ओर आकर्षित होती है, तो यह हमें संसार की चीजों को पाने की इच्छा देती है। धन, यश, प्रेम, और भौतिक सुख—हमारा सारा जीवन इनकी ओर भागते हुए बीत जाता है। लेकिन इस भागदौड़ का परिणाम अक्सर खालीपन होता है। जितना पाते हैं, उतना खोते जाते हैं। काम का परिणाम 1. हिंसा : जब कोई हमारी इच्छाओं में बाधा डालता है। 2. चोरी : जब हमारी असफलता हीनता में बदल जाती है। 3. परिग्रह : ज...